क्रांतीकारी सेवालाल बापुर बोल वचन

क्रांतीकारी सेवालाल बापुर बोल वचन

1) पाच पारा: - चोरी, हिंसा, मद्यपान, लबाडी अन व्याभिचार मत करो। सणो सामळो गोर भाई, चोरी मत करजो कोई। लाज रखाडो धर्मेरी, मत लो जीव, काडो मत लोही। दारु मत पिवजो कोई, धर्मेरी वाणी रखाडो भाई। भडके जावो लांबी झाडी, मत बोलजो लुची लबाडी। केशुला नहीं मोरीयो आजी, मत करजो रंडी बाजी 1) सौतार वळख सौता करलो। जीवनेम दिवो लगा सकोछो। 2) अपने पाल, आपणच ठोकलो। स्वावलंबी बणो। 3) छाती करीय, वोन साथ मळीया हाय खाये, ओनुरो ढेर पड जाय। 4) आपण काळे माथेर लोक छ। पगे पगेपर चुकते राछा। 5) सत्यकाप फत्य करो। भलेती भेट रखाडो। 6) केनीबी नानक्या पोटो मत समजो। भळण रो 7) रोयती राज मळेनी, कल्लोळ करणु लागछ 8) केशुला नहीं मोरीयो, तो गोरुर न्याय मळी 9) गोर छोतो गौर करो, विचारे बगैर काही मत करो 10) मरी मट्टी सरजीत करो, आळसी बणन भूकेती मत मरो 11) कलीयुग ओयवाळो छ। ये युगेम महागाई बढीय। 12) संघटन बढावो, संघटन धण मोट शक्ती छ। 13) गरीबन डांडन मत खावो, अन कोर्टेरे वाटेन मत जावो। 14) जाणजो, छाणजो, पछज मानजो, अन सत्य मार्गेन चालजो। 15) कष्ट करते रो अन कष्टेन खरो जीवन समजते रो। 16) जग बदलतो रिय, बदलते जगेन ओळखते रो। 17) देव-देवी माणसेर पैदास छ, सतमार्गी माणसेनच देव समजो। 18) भूले-चुकेन वाट वतावो, अन भुकेतर ससेर भुक तरस मिटावो। 19) निराधारेवून आधार, हिंमत दो, प्रत्येकेन किंमत दो। 20) जन्मदातावून भूलो मत, देव धर्मकारण वेळा वाया घालो मत। 21) संकट प्रसंगी, मारे पाच पारार पालन करो।

G H Rathod

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